सरयू


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यस्याः पश्चिमतो नद: प्रवहति ब्रह्मयत्मजो घर्घर:
सयमीप्यं न जहाती यत्र सरयू: पुण्या नदी सर्वदा।

ऋग्वेद में सर्वप्रथम सरयू का उल्लेख उन इक्कीस बडी नदियों के सन्दर्भ मे आता है जिसमे सरस्वती सिन्धु आदि की चर्चा की गयी है। रुद्रयामल अयोध्या माहात्म्य मे घाघरा को नद मानकर इसे सरयू नदी का भाई कहा गया है और इसलिए यह वर्णित किया गया की यह अपनी ज्येष्ठ भगिनी सरयू की रक्षा में सदैव तत्पर रहता है।

यह नदी फैजाबाद जिले में मगलसी परगना के एकदम उत्तरी-पश्चिमी छोर पर प्रवेश करती है और बिडहर एकदम पूर्वी छोर पर जिले से बाहर चली जाति है। हिन्दू धर्म ग्रन्थों के अनुसार महर्षि वशिष्ट सरयू नदी को मानसरोवर झील से अयोध्यय की जनता की माँग पर यहा लाये थे।
मानसरोवर ब्रमहा जी द्वारा संकलित भगवान विष्णु के कृषि केआाँसुओं का संग्रह माना जाता है। इसलिए सरयू को कभी-कभी वशिष्ट कन्या अथवा ‘वशिष्ट-गंगा भी कहा जाता है।

इसी से सांदर्भित अयोध्यय के विद्वान रामरक्षा त्रिपाठी निर्भीक की अयोध्या दिग्दर्शन पुस्तक में सरयू की उत्पति की जो कथा वर्णित है उसमें उनके कुछ पौराणिक नामो की चर्चा भी आती है जिसके अनुसार श्री सरयू जी के अनेको नाम है- भगवान के नेत्रो से उत्तपन्न होने से नेत्रजा चिदानंदा वारिणी होने से ‘ब्रह्मयनन्द-द्रव’ मानसरोवर मे रहने और इससे निर्गत होने से ‘सरयू’ और ‘मानस-ंंनंदिनी’ तथा वशिष्ट जी के द्वारा आने से वाशिष्ठी उनका नाम पडा ।

जलरुषेण ब्रह्मे व सरयू मोक्षदा सदा अर्थात श्री सरयू जी साक्षात जल स्वरूप ब्रह्म हैं।

चंद्रदेव के चंद्रयवती अभिलेख के अनुसार-सरयू का एक भाग घाघरा है सरयू नाम की दो अन्य घराएॅ है जिसमे नेपाल के क्षेत्र में इसे बबई नदी और भारतीय क्षेत्र में इसे सरयू या सरजू कहा जाता है।

अयोध्या की चौरासी कोस परिक्रमा परिधि के भीतर पडने वाली रामरेखा नदी वर्त्तमान में छावनी, बस्ती में प्रतीकयत्मक रूप से मौजूद भी सरयू में आकर मिलती है। अर्थात अपनी पौराणिक और प्राचीन मान्यतयओं के लिहाज से सरयू का माहात्म्य बहुत विशद रूप से फैला हुआ है जिसकी प्रतिष्ठा में राम-चरित्र महिमा गायन के दो प्रमुख ग्रन्थ रामायण वाल्मीकि-कृत तथा, रामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास-कृत का विशेष योगदान है।

वही फ़ैज़ाबाद के सन्दर्भ में सरयू का सर्वाधिक महत्व है। अयोध्या तीर्थ के उत्तर बहने वयली सरयू फ़ैज़ाबाद में सर्वाधिक प्रशस्त रूप में गोप्रतयर घाट में प्रवाहित होती है जहाँ प्रभु राम ने जल-समाधि ली थी । गोप्रतार घाट की महिमा में भी कहा गया है की सरयू-घाघरा के प्रवाह में यहाँ कार्तिक मास-भर स्नान करन चाहिए|

इसके अतिरिक्त फ़ैज़ाबाद के ही तमाम क्षेत्रो के समीप से गुजरते हुए सरयू नदी उनकय पौराणिक सन्दर्भो में माहात्म्य स्थापित करती है जिसमें अधिकांश क्षेत्र अयोध्या में आते हैं। इसमें प्रमुख रूप से ढेरो तीर्थ हैं जिसमें – गुप्तहरि चक्रहरि चक्र तीर्थ प्रहलाद घाट ब्रह्मकुण्ड ऋणमोचन घाट पापमोचन घाट लक्ष्मण किला सहस्त्रधारा चन्द्रहरि नागेश्वरनथ रामघाट श्रृंगी ऋषि आश्रम तथा यम-स्थल ‘जमथरा’ विशेष उल्लेखनीय हैं।

फ़ैज़ाबाद के सन्दर्भ में सरयू नदी के संगम स्थल भी बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं- श्री सरयू-घाघरा संगम श्री सरयू-तिलोकदकि संगम कुटिला वरस्त्रोत और श्री सरयू कुटिला हैं जिन सभी को तीर्थ की संज्ञा प्राप्त है।

Project by: IIPian Saransh, Location: Ayodha, Uttar Pradesh

                             


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